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14 फ़रवरी 2014

"दफा हो ! मरजाना



"दफा हो ! मरजाना 
जब देखो शराब पीकर किसी के भी घर में घुसा चला आता हैं " "ओये मेमसाहेब अपने साहब को ले जाओ यहाँ से " जोर से आती आवाज़ को सुनकर नंदनी घर से बाहर की तरफ दौड़ी सामने अनिरुद्ध नशे में धुत्त जमीन पर बैठा था , हाथ का सहारा देकर उसको घर लायी और सामने फोल्डिंग पलंग पर लिटाया अनिरुद्ध के मुह से नशे में धाराप्रवाह माँ - बहन की गालियाँ निकल रही थी . नंदनी की आँखे भर आई उसका यह हाल देखकर , माँ बाप का एकलोता बेटा जिसकी खूबसूरती पर उसकी सहेलिया भी रीझ उठी थी आज इस हालत में था माता पिता की मृत्यु के बाद सारा पैसा उसके हाथ में आगया था अच्छी भली बैंक की नौकरी छोड़ कर उसने अपना बिज़नस शुरू करने की सोची अनुभव की कमी दीखावे की प्रवृति और बुरी संगत ... आज घर में खाने को भी कुछ ना था वोह सुधारना चाहता था परन्तु आदते कहाँ जल्द्दी से पीछा छोडती हैं और नंदनी भी किस मुह से माता पिता के घर जाए घर से भाग कर उसने अनिरूद्ध से ब्याह किया था . कुछ तो करना होगा सोचते सोचते उसने एक निश्चय किया घर को ताला लगाकर उसने अखबार की कतरन हाथ में ली और चल पढ़ी नशा मुक्ति केंद्र ...
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