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18 दिसंबर 2014

फैसला

फैसला 
" हमारी शादी तो उसी फिक्स डेट पर होगी ना ! आहा !कुछ दिन और बस , फिर तुम और मैं नयी दुनिया बसायेंगे , तुम्हारे बाबा ने संपत्ति में तुम्हारे नाम जो मकान नॉएडा में छोड़ा हैं वहां थोडा मॉडिफिकेशन करा लो शादी से पहले ही "
" ह्म्म्म !! देखते हैं क्या होता हैं ! अभी तो बाबा को गये १३ दिन भी नही हुए , चलो! फ़ोन रखता हूँ फिर बात करता हूँ " कहकर रोहित ने ठंडी साँस ली 
कुछ देर सोचने के बाद उसने फिर से नेहा को फ़ोन मिलाया " सुनो मैं अब नॉएडा नही रह सकता मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ | इतनी जमीन हैं हमारी पुश्तेनी अब खेती करूंगा | भैया अमेरिका से यहाँ शिफ्ट नही हो सकते और मेरी माँ अपनी ज़ज्बातो के संग बाकि की उम्र जियेगी नाकि कंक्रीट tके जंगल में किसी फ्लैट में बंद होकर | तुम सोचकर मुझे जवाब देना |

17 दिसंबर 2014

" बोल काम करेगा "

"बहुत गालियाँ दे चुकी हो बेरोज़गारी पर , आओ मैं दिखाती हूँ तुमको एक ऐसा उद्योग जहा जन्म से पहले ही रोजगार का जुगाड़ हो जाता हैं और हम सब उस रोज़गार के पनपने में सहायक हैं . क्यों? विश्वास नही हो रहा मेरी बात पर ! "कहते हुए निशा दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और कार तेज़ी से गाँधी रोड की तरफ मोड़ दी , बिंदाल नदी पर बने पुल के नीचे बनी झुग्गियो के सामने जैसे ही कार रुकी नंगे और गंदे कपडे पहने बच्चो ने शोर मचाना शुरू कर दिया रुमाल से मुह को दबा कर मैं नीता दी के पीछे चलने लगी उफ़ यहाँ कौन सा कुटीर उद्योग लगा हुआ हैं ? एक कोठरी में घुसते ही नीता दी ने मुझे कहा " अब आया कुछ समझ " चारो तरफ गंदगी का साम्राज्य था प्रोढ़ उम्र की एक गर्भवती महिला एवं उसका पति छोटे छोटे बच्चो से घिरे थे , घर की माली हालत बहुत ख़राब लग रही थी परन्तु इतने सारे बच्चे !! कहाँ से खाते होंगे और इनका रोजगार से क्या लेना देना यह सोच मुझे परेशान करने लगी ...नीता दी ने कहा यह लोग भिखारी हैं .बच्चे पैदा करते हैं भीख मंगवाने के लिय , इनका अपना एक मकान भी हैं प्रेम नगर में, परन्तु रहते यही हैं आदत सी पढ़ गयी हैं इनको ऐसे हालत में रहने की , मैं इनके लिय एक N G O चलाती हूँ परन्तु तुम जैसे लोग तरस खाते हैं इन जैसो पर , इनको भीख मत दो काम दो तुरंत आय कीचाह में यहाँ की हर नारी हर साल बच्चा पैदा करने को मजबूर की जाती हैं और हर बच्चा भीख मांगने को मजबूर ,
घर आते हुए रेड सिंग्नल पर अब मेरे हाथ पर्स से पैसे निकाल लेने को नही उठे अपितु बोल उठी " "बोल काम करेगा '

" कसूर किसका "

दीवार पर लटकी तस्वीर देखकर नैना की आँखों से अविरल आंसू बहने लगी आज एक बरस बाद मायके आई थी माँ की बरसी पर | १3महीने पहले आयुष एक हादसे में चल बसा था | कितनी बार कहा था अपने इस १४ बरस के भाई कोकि जब भी ट्यूशन पढने जाया करो कानो में हैडफ़ोनलगकर गाने मत लगाया करो |सड़क पर चलते ट्रैफिक की आवाज़ नही सुनाई देती परन्तु आजकल के किशोर उम्र के बच्चे कहाँ किसी की बात सुनते और ऐसे ही एक दिन एक कार वाले ने टक्कर मारी और फरार हो गया | आस -पास गुजरती किसी भी गाड़ी ने रुक कर उसे समय से हॉस्पिटल नही पहुँचाया और अनहोनी होकर रह गयी \ उसके जाने ने माँ को बुरी तरह तोड़ दिया और दो महीने से पहले ही माँ को दिल का दौरा पढ़ा और स्वर्ग सिधार गयी| चुन्नी के पल्ले से तस्वीर पोंछती नैना उस पल को कोस रही थी |कसूर किसी का भी रहा हो घर सूना उसका हुआ था