योगदानकर्ता

30 जनवरी 2015

फख्र


" पापा ! कैसी लग रही हूँ यूनिफार्म में !! "
ऋचा को यूनिफार्म में देख कर्नल साहेब की आँखे भर आई
" बहुत सुन्दर बेटा "
"अभी तक मैं अपने बेटो पर नाज करता आया था , आज मेरी बेटी ने भी फख्र से मेरा सर ऊँचा कर दिया '
बिटिया को सर थपथपाते हुए कर्नल साहेब को याद आने लगी अपनी माँ की बाते जो तब उन्होंने नही मानी थी
' अरे लड़की हैं तेरी बीबी के गर्भ में , क्या करोगे तीसरा बच्चा , लड़का होता तो भी ठीक था सफाई करा दो ,आजकल लडकिया नाको चने चबवा देती पहले इनको इतना पढाओ फिर इतना दहेज़ देके ब्याहों ज़माना भी कित्ता ख़राब !"
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