योगदान देने वाला व्यक्ति

18 सितंबर 2013

यार क्या आइटम हैं

"सारी उम्र बीत गयी रे छोर्री!! "
"नु ही साड़ी पहनते हुए . इब इस उम्र में क्या सूट पहनूगी ! यह सुथ्हन वाले सूट ब्याह के बाद कोणी पहरे जावे म्हारी बिरादरी में!!
 ."ब्याह के बाद छोरी की चाहे जित्ती भी उम्र हॉवे उसे साडी ही पहननी हॉवे . और सर पर पल्लू उतरने न पावे तो तू चाहवे के इब मैं सलवार सूट पहर लू ..न मेरे से कोनि हॉवे येह, जा मैं कमरे से बाहर ही ना निक्लुगी इब "
 कहते कहते मिथलेश ने अपनी साड़ी को और कसकर लपेट लिया अपने बदन पर 
यह आजकल की बहुए  न हमने इनके एतराज किया इनका दूसरी जात के होने पर न हमने इनको टोका कि यह न पहनो वोह न पहनो जो यह शहर आकर बेशरम सी घूमती रवे बिना पल्लू के कही बांह नंगी तो कही टांग .. तुमको कह दिया कि जो मर्ज़ी करो 
पर अब हमपर भी ज़बरदस्ती कि अम्मा सीधे पल्ले की साड़ी न पहनो अम्मा सर पर पल्लू न रखा करो हमारे दोस्तों के सामने . अब यह सलवार सूट की जिद !! मुझे अब नही रहना इनके घर एक तो पहले ही महरी और मिसराइन का काम सौप रखा हैं उस पर अब नयी जिद !१ इस से भली तो अपने गांव में थी .... बुदबुदाती  हुयी मिथलेश  घंटो तक बिस्तर पर पढ़ी रही उदास सी .
                                                                          जब   पानी पीने रसोई की तरफ बढ़ी तो बहु की सहेलियों की हंसी सुनाई दी "
यार क्या आइटम हैं तेरी सास कसम से ..""


"..................नीलिमा शर्मा ...........

3 सितंबर 2013

निवेश किसका?

एक लघु कथा

" सुणो जी आज दफ्तरों सीधा मेरे कमरे विच आणा . ए की गल्ल होई सीधा माँ दे कोल !!"
"मर जाणिये"
" जे अज मैं अप्नी माँ नु पूच्दा हाँ ते कल तेरे वि बच्चे तेन्नु पूछन गे !! इन्वेस्मेंट हमेशा पैसे दा नि करीदा !! "
जा बीजी वास्ते वी चाह बना लेया
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ हिंदी अनुवाद ...

." सुनो जी आज दफ्तर से सीधा मेरे कमरे में आना १ यह क्या बात हुयी सीधा माँ के कमरे मैं जाते हैं आप '
' मेरी प्यारी अगर आज मैं अपनी माँ को पूछता हूँ तो कल तेरे बच्चे भी तभी तो तुझे पूछेंगे न , निवेश हमेशा पैसे का नही किया जाता ......
जाओ माँ के लिय भी चाय बना लेना ".नीलिमा

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~Roman.........
" Suno ji ! Aaaj Office se seedha Mere Room Mai Aana . Yeh Kya Bat Huyi K Aap Seedha Maan ji K Room Mai Chale Jaate Ho !! "
"My Darling " Aaj Agar Mai Apni Maan KO Poochta Hun Tabhi Kal Tere Bachhe Bhi Tujhe Poochenge Na ! Investment Hamesha Money Ka Nhi Kiya Jata , "
Jao Maa K Liy Bhi Chay Bana Lena .


नीलिमा शर्मा

1 सितंबर 2013

बोल भी इब !!!"

 सुनसान भोपा रोड पर लड़के ने हाथ से लड़की की चलती  सायकिल  रोक ली

"ए  छोरी !! माण  ले म्हारी  बात . एक भी लुगाई ना  मेरे घर  में ... माँ को गुज़रे  एक बरस हो लिया . तेरे आने से उजाला हो जावेगा
 रोटी भी गरम मिलन लगेगी  सबको ... तन्ने सब सुख दूंगा कपडा गहना सब ...  यो मत समझ  की मैं आवारा छोरा  और तेरे पीछे  प्रेम की खातिर भाग रा  मेरे तो इब्बी  पढने के दिन  ..बस बापू /भाई को रोटी मिलती रवे टेम  से तो मैं बेफिक्र होके सहर जाऊ पढने ..बोल भी इब "

"तो  सुन मेरी भी बात  मेरे बापू को मरे ५ साल हो लिय अपने बापू को भेज मेरी माँ    पे चादर डाल  दे ....उन दोनों का बुडापा  भी कटेगा और थारे घर गरम रोटी भी पकेगी . और मैं भी आ जाओंगी  थारे घर .. थारी बहन बनके  राखी पर दे दियो  यो कपडे गहने सब .......

बोल भी इब !!!"

सुनसान सड़क पर अब लड़की अकेली खड़ी  थी ..................

15 अगस्त 2013

माँ ...आज क्या हैं .......

लघु कथा 

अरे मेरा बच्चा किधर गया !! अभी तो यही था ... भूख से तड़प रहा था .गयी थी साथ वाली कोठी मैं ..कुछ कम करदू तो शायद कुछ खाने को दे दे ... अपने गांव से आये थे शहर जाकर चार पैसे कमाएंगे .जिल्लत की जिन्दगी से निजात मिलेगी पर यहाँ तो हम
छुवाछुत का शिकार हो गये ..बाबु लोग यह सब तो गाँव में होता हैं पर यहाँ शहर में उस'से भी ज्यादा .काम मांगने जाओ तो कोठी वाली पूछती हैं कोण जात की हो ? अब मैं अपनी जात छुपकर रखना सीख गयी हूँ .. कल उस पीली कोठी वाली ने काम से निकाल दिया अब १० ० ० कमरे का किराया खाना पीना मच्छी कितना पयेसा लगता हैं बाबु .. तुम कहते हो बच्चो को स्कूल भेज दूँ बाबु जिन्दगी चाहिए मुझे बच्चे की जहर वालाखाना खाने के लिय नही भेजना उसको वहां ..भूख से एक वक़्त की रोटी मंजूर हैं .अपने बच्चो को भेजो न एक दिन उस स्कूल मैं ....
अरे मुन्ना किदर से आया बिटवा यह लड्डू किसने दिए .आंसू लिय आँखों मैं माँ रोने लगी
ए माँ आज कुछ हैं वहां लोग सुथरे कपडे पहने लड्डू बाँट रहे पेड़ लगा रहे कुछ बाते भी बोल रहे .फोटू भी खींची हम सबकी दो दो लड्डू दिए थे उन्होंने
पर .लो पूरे दस लड्डू लाया हूँ छुपाकर .सबकी प्लेटो से .
कितने दिन हुए थे न मीठा खाए .......जा इ झंडा वहां खिड़ की में लगा दे
माँ लड्डू कितना मीठा हैं न .पर आज तो दीवाली भी नही

माँ ...आज क्या हैं .......
रेडियो पर गाना बज रहा था .......... नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठ्ठी में क्या हैं ???
मुठ्ठी में हैं ....................


Neelima sharma

11 अगस्त 2013

मैं भी बहुत कुछ हूँ तुम्हारे लिय "

"कल  भी सन्डे हैं और  एक बार फिर मैं अकेली .. आखिर कब तक ऐसे चलेगा "
" अब बताओ क्या करू  नौकरी करनी हैं तो क्या नखरे  ऑफिस वाले जहाँ कहेंगे रहना होगा न  आजकल ऑडिट चल रहा हैं सन्डे को भी काम करना होता हैं " पक्का अगले सन्डे घर आऊँगा  मैं भी बच्चो के लिय उदास हूँ
  फ़ोन रखकर निम्मी सोचने लगी .......  क्या सिर्फ बच्चो के लिय .मेरा कोई वजूद नही   मैं तो जैसे केयरटेकर बनकर रह रही हूँ यहाँ  खुद १५० किमी दूर दुसरे शहरमें नौकरी कर रहे हैं
 मन किसी काम में नही लग रहा था  पनीर उठाकर फ्रीज मैं रख दिया  नही बनाना मुझे कुछ भी ... बच्चे तो वैसे भी मेग्गी खाकर खुश हो जायेगे  .  
 टिंग टोंग।सुनते ही  हडबडा कर उठी  निम्मी ने लाइट जलाकर वक़्त देखा .रात के १ बजे हैं  कोन होगा इस वक़्त .दुपट्टा ओउध्ते हुए उसने खिड़की से बाहर झाँका  एक परछाईसी गेट कूदते हुए नजर आई .उफ्फ्फ्फ़ कोई चोर होगा पक्का  सबको पता हैं कि मैं अकेली हूँ बच्चो के साथ ... राम राम करते हुए उसने मिम्याती हुई आवाज़ मैं पूछा " कौन हैं वहां"
 "निम्मी खोल ना  दरवाज़ा  कब से बारिश मैं भीग रहा हूँ "
अह्ह्ह यह तो उनकी आवाज़ हैं
 आआप!!! "
" क्यों? किसी और का इंतज़ार था क्या "
 "नही किसी का इंतज़ार ही तो नही था "
 "मैंने सुन ली थी तुम्हारी खामोश सिसकिया फ़ोन पर   और रहा नही गया सो आगया "
" सुबह सुबह  वापिस चला जाऊँगा .
बॉस से कल १२ बजे तक आने का कह कर आया हूँ "
 निम्मी सुनते ही  किलक उठी मन से  "हाँ मैं भी बहुत कुछ हूँ तुम्हारे लिय "
 सुनो  क्या खाओगे  इस वक़्त ???

10 अगस्त 2013

आँखे

निशा की
आँखे दर्द कर रही थी, कई दिनों से जलन हो रही थी बस हर बार खुद का ख्याल न रखने की आदत और हर बार अपना ही इलाज टाल जाना उसकी आदतों में शुमार हो गया था । सुनील आज जबरदस्ती उसको दृष्टि क्लिनिक ले ही गये .. . सामने कतार लगी थी । इतने लोग अपनी आँखे टेस्ट करने आये हैं, सोच कर निशा को हैरानी हुई । अपना नंबर आने पर भीतर गयी और डाक्टर की बताई जगह पर चुपचाप बैठ गयी .. आँखे टेस्ट करते हुए डाक्टर की आँखों में खिंच आई चिंता की लकीरों को निशा ने बाखूबी पढ़ लिया था । स्ट्रेस जांचा जा रहा था उसकी आँखों में कई अलग अलग मशीनों पर, सुनील परामर्श शुल्क चूका रहे थे अलग अलग काउंटर पर और निशा अलग अलग मशीन पर जाकर आँखे दिखा रही थी । मन चुप था कुछ कह पाने में असमर्थ सा । आखिरकार 3 घंटो के बाद डाक्टर ने अंदर बुलाया और कहा देखिये .. सुनील जी आपकी पत्नी की आँखों में काला मोतिया बिंद की शुरूवात हैं अभी कुछ कहा नही जा सकता, यह दवा डालिए और तीन माह बाद फिर से चेक-अप के लिय आइये । बस दोनों वापिस लौटे, दोनों गम में थे, अपनी अपनी सोचो की परिधि में ... कि इलाज का खर्च कितना आयेगा, घर कौन सम्हालेगा.मुझसे कैसे सम्हाला जयेगा घर , निशा की सोच थी क्या मेरी आँखे ठीक हो पायेगी ..... वैसे ही मैं अकेली हूँ मन से और अब ??? क्या सुनील मेरा ख्याल रखेंगे जिसने उम्र भर कभी पानी तक न पिया अपने हाथ से क्या अब उसका ख्याल करेगा बस अपनी गति से चल रही थी और उन दोनों का मन अपनी गति से .......... और उदास था दोनों के मन का अपना अपना कोना 

.....नीलिमा शर्मा

7 अगस्त 2013

बात करोगी ना मुझसे

" मत करो ना मुझे इतनी रात  को फ़ोन । कहा था न मेरी तबियत ठीक नही हैं  और आपको कोई फर्क नही पढता  रूमानियत का आलम  इस कदर छाया हैं तुम पर के तुम न वक़्त देखते हो न  माहौल . बस सेल फ़ोन मिलाया  और कैसी हो तुम !!!!  क्या पहना हैं आज ??""
 अभी ३ महीने भी नही हुए थे कामिनी की सगाई को .और दिनेश  उसे देर रात  को रोजाना फ़ोन करता था 
अब कैसे कहे कम्मो कि उसे नही पसंद था ऐसी वैसी बाते करना  
"नाराज हो गया न  दीनू " अभी उसका फ़ोन आया था  कि "आपकी बेटी क्या किसी और को पसंद करती हैं जो मुझसे बात नही करती   बात करेंगे तभी तो एक दुसरे को समझ पाएंगे हम  और तुम हो कि  हमेशा अपनी ही दुनिया में  गुमसुम रहना पसंद करती हो "
माँ के गुस्से वाले शब्द सुन कर कम्मो मन ही मन ड र गयी थी  बड़ी मुश्किल से यह रिश्ता हुआ था वरना २ ९ साल की लड़की को कहाँ  अछ्हा  बिज़नेस  वाला लड़का मिलता  हैं ..पर उसकी द्विअर्थी बाते ............उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़  
 सोचते सोचते  कम्मो की उंगुलियां  दिनेश का नम्बर मिलाने   लगी .....अब शादी तो करनी हैं  आदत बनानी होगी उसको ऐसे बातो की ........