योगदान देने वाला व्यक्ति

11 फ़रवरी 2015

अभिजात्यता


"चलो काम ख़तम हुआ | साहेब , बीबी भी पार्टी पर जा रहे | अब घर जाकर आराम करूंगी " सोचते सोचते कांति कोठी से बाहर निकली तो तडाक तड़ाक !! चांटो की आवाज़ सुनकर उस ने पीछे पलट कर देखा और कसकर शाल लपेट ली 
सिडाना साहेब पत्नी को थप्पड़ लगा रहे थे और हाथो में मुंह छुपाये उनकी बीबी खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी | ना सुन सकने वाली माँ - बहन की हर गाली इस वक़्त सड़क पर गूँज रही थी |और इंसानियत शर्मिंदा हो रही थी | कसूर इतना था कि बीबी जी इवनिंग गाउन पर ठण्ड से बचने को शाल पहन कर आगयी थी |
छोटे शहर की थी ना उसकी तरह

30 जनवरी 2015

फख्र


" पापा ! कैसी लग रही हूँ यूनिफार्म में !! "
ऋचा को यूनिफार्म में देख कर्नल साहेब की आँखे भर आई
" बहुत सुन्दर बेटा "
"अभी तक मैं अपने बेटो पर नाज करता आया था , आज मेरी बेटी ने भी फख्र से मेरा सर ऊँचा कर दिया '
बिटिया को सर थपथपाते हुए कर्नल साहेब को याद आने लगी अपनी माँ की बाते जो तब उन्होंने नही मानी थी
' अरे लड़की हैं तेरी बीबी के गर्भ में , क्या करोगे तीसरा बच्चा , लड़का होता तो भी ठीक था सफाई करा दो ,आजकल लडकिया नाको चने चबवा देती पहले इनको इतना पढाओ फिर इतना दहेज़ देके ब्याहों ज़माना भी कित्ता ख़राब !"

17 जनवरी 2015

( स्वयंसिद्ध)

"यह बच्चा कौन हैं जो सड़क पर झाड़ू लगा रहा हैं "
दोपहर में मुश्किल से आँख लगी थी कि झाडू की आवाज़ से खलल पड़ गया और मीना जोर से चिल्लाई 
माँ आपने राशन से गेंहू लाने को कहे थे न , मैं वोह लेकर आ रहा था वहीँ यह बच्चा भीख मांग रहा था मैंने कहा मेरे साथ घर चलो खाना खिला दूंगा पर पैसे नही दूंगा क्या पता पैसे लेकर क्या गलत आदत लगा बैठ'ता " सनी ने माँ को बताया
" पर यह अब झाड़ू क्यों लगा रहा हैं "
" माँ साइकिल से उतारते वक़्त थोडा गेहू गिर गया था "
" गलत बात ! आपको खुद एकत्र करना चाहिए था ,वोह बच्चा हैं | तुम इसको खाना खिलाने लाये हो, पर बदले में कुछ काम भी करा लिया इस'से इसके बालमन को लगेगा कही भी छोटा सा काम करो दोएक वक़्त का खाना खा लो ,खुद काम करके इसको सीख देते कि इंसान को सब काम खुद करने चाहिए अगर तुम चाहते हो यह आगे भीख न मांगे तो इसको शाम को मुफ्त शिक्षा दिया करो "
कहते हुए मीना बच्चे के लिय खाना लेने रसोई घर की तरफ चल दी और सनी भी माँ के कहे का चिंतन करने लगा

उतना ही

"
उतना ही "

नीचे आँखे किये वोह मुस्कुरा कर बोली 
" अब भी उतना ही " 
" और कितना "
"जितना तुम्हारा दिल कहता उस'से बस उतना दुगुना " 
"मेरा दिल तो कहता तुम मुझसे प्यार ही नही करती "
" तो यही समझ लो मैं दुगुना प्यार नही करती "
कुछ बाते जो पता होती हैं तो भी उसे बार बार लफ्जों में सुन लेने का दिल चाहता हैं और पुरुष जानते हैं स्त्री के दिल पर उनका ही अधिकार हैं फिर भी शरारती अंदाज़ में हर बार बार बार पूछते हैं 
"कितना प्यार करती हो मुझे "
और स्त्री मंद मंद मुस्कुराती हैं मन के अंदरूनी कोने से 
"उतना ही 

18 दिसंबर 2014

फैसला

फैसला 
" हमारी शादी तो उसी फिक्स डेट पर होगी ना ! आहा !कुछ दिन और बस , फिर तुम और मैं नयी दुनिया बसायेंगे , तुम्हारे बाबा ने संपत्ति में तुम्हारे नाम जो मकान नॉएडा में छोड़ा हैं वहां थोडा मॉडिफिकेशन करा लो शादी से पहले ही "
" ह्म्म्म !! देखते हैं क्या होता हैं ! अभी तो बाबा को गये १३ दिन भी नही हुए , चलो! फ़ोन रखता हूँ फिर बात करता हूँ " कहकर रोहित ने ठंडी साँस ली 
कुछ देर सोचने के बाद उसने फिर से नेहा को फ़ोन मिलाया " सुनो मैं अब नॉएडा नही रह सकता मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ | इतनी जमीन हैं हमारी पुश्तेनी अब खेती करूंगा | भैया अमेरिका से यहाँ शिफ्ट नही हो सकते और मेरी माँ अपनी ज़ज्बातो के संग बाकि की उम्र जियेगी नाकि कंक्रीट tके जंगल में किसी फ्लैट में बंद होकर | तुम सोचकर मुझे जवाब देना |

17 दिसंबर 2014

" बोल काम करेगा "

"बहुत गालियाँ दे चुकी हो बेरोज़गारी पर , आओ मैं दिखाती हूँ तुमको एक ऐसा उद्योग जहा जन्म से पहले ही रोजगार का जुगाड़ हो जाता हैं और हम सब उस रोज़गार के पनपने में सहायक हैं . क्यों? विश्वास नही हो रहा मेरी बात पर ! "कहते हुए निशा दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और कार तेज़ी से गाँधी रोड की तरफ मोड़ दी , बिंदाल नदी पर बने पुल के नीचे बनी झुग्गियो के सामने जैसे ही कार रुकी नंगे और गंदे कपडे पहने बच्चो ने शोर मचाना शुरू कर दिया रुमाल से मुह को दबा कर मैं नीता दी के पीछे चलने लगी उफ़ यहाँ कौन सा कुटीर उद्योग लगा हुआ हैं ? एक कोठरी में घुसते ही नीता दी ने मुझे कहा " अब आया कुछ समझ " चारो तरफ गंदगी का साम्राज्य था प्रोढ़ उम्र की एक गर्भवती महिला एवं उसका पति छोटे छोटे बच्चो से घिरे थे , घर की माली हालत बहुत ख़राब लग रही थी परन्तु इतने सारे बच्चे !! कहाँ से खाते होंगे और इनका रोजगार से क्या लेना देना यह सोच मुझे परेशान करने लगी ...नीता दी ने कहा यह लोग भिखारी हैं .बच्चे पैदा करते हैं भीख मंगवाने के लिय , इनका अपना एक मकान भी हैं प्रेम नगर में, परन्तु रहते यही हैं आदत सी पढ़ गयी हैं इनको ऐसे हालत में रहने की , मैं इनके लिय एक N G O चलाती हूँ परन्तु तुम जैसे लोग तरस खाते हैं इन जैसो पर , इनको भीख मत दो काम दो तुरंत आय कीचाह में यहाँ की हर नारी हर साल बच्चा पैदा करने को मजबूर की जाती हैं और हर बच्चा भीख मांगने को मजबूर ,
घर आते हुए रेड सिंग्नल पर अब मेरे हाथ पर्स से पैसे निकाल लेने को नही उठे अपितु बोल उठी " "बोल काम करेगा '

" कसूर किसका "

दीवार पर लटकी तस्वीर देखकर नैना की आँखों से अविरल आंसू बहने लगी आज एक बरस बाद मायके आई थी माँ की बरसी पर | १3महीने पहले आयुष एक हादसे में चल बसा था | कितनी बार कहा था अपने इस १४ बरस के भाई कोकि जब भी ट्यूशन पढने जाया करो कानो में हैडफ़ोनलगकर गाने मत लगाया करो |सड़क पर चलते ट्रैफिक की आवाज़ नही सुनाई देती परन्तु आजकल के किशोर उम्र के बच्चे कहाँ किसी की बात सुनते और ऐसे ही एक दिन एक कार वाले ने टक्कर मारी और फरार हो गया | आस -पास गुजरती किसी भी गाड़ी ने रुक कर उसे समय से हॉस्पिटल नही पहुँचाया और अनहोनी होकर रह गयी \ उसके जाने ने माँ को बुरी तरह तोड़ दिया और दो महीने से पहले ही माँ को दिल का दौरा पढ़ा और स्वर्ग सिधार गयी| चुन्नी के पल्ले से तस्वीर पोंछती नैना उस पल को कोस रही थी |कसूर किसी का भी रहा हो घर सूना उसका हुआ था