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29 दिसंबर 2017

यह कैसा ममत्व

आज पुलकित थी रज्जो काकी उनके नाम एक ख़त जो आया था \ बार बार उस ख़त को छूकर फिर आँखों से लगाती फिर बोसा देकर सीने से लगा लेती बंद कर दिए थे अब सबने ख़त लिखने ईमेल , व्हाट्सअप्प पर सन्देश भेज देते थे , फ़ोन पर बात करते चेहरा देखते मिलना जुलना भी अब कम हो गया था | लेकिन बूढी रज्जो आज भी सिरहाने रखे खतो को खोलकर देखती लफ्जों को छूती जो उसके बब्बन ने दुबई से लिखे थे | अब तो बहु की मर्ज़ी होती तो बब्बन से बात करा देती थी नही तो उसके सामने ही बब्बन को कह देती " अम्मी सो रही हैं आप खामखा पैसे बर्बाद ना करो इंटरनेशनल कॉल हैं आपकी , बस मेरी बात सुनो ................और बाहर निकल जाती . अली देख रहा था बड़ी अम्मी को बहुत देर से और .करीब जाकर धीमे से बोला " किसका प्रेमपत्र आया बड़ी अम्मी " बड़ी अम्मी टूटे दांतों से पोपली हंसी हँसते हुए बोली "तेरे बाप का " दिखाओ तो जरा " ख़त की इबारत थी - आपके हाथ के आलू के पराठे खाने का मन कर रहा हैं अम्मी यखनी पुलाव भी बनाना इस जुम्मे को , आ रहा हूँ आपको मिलने अपने हाथ से कौर खिलाएगी न .... अली को याद आया अपनी अम्मी का कठोर चेहरा ........... तंग मत किया करो जो बने खाओ या चुपचाप मग्गी खा ले

29 अक्टूबर 2015

कड़वा करवा

"बीजी  क्या मैं करवाचौथ  रख लूँ !"
 सगाई के चार दिन बाद ही   ओमी  ने इच्छा जाहिर की
 बीजी हैरानसी उसे
 देखते हुए बोली
" मरजाने !! लोग क्या कहेंगे | कोई लड़के भी करवा रखते हैं "
"नही बीजीमुझे व्रत  रखने दो ना ! ऐसे प्यार बढ़ता वो भी तो रखेगी मेरे लिए  "
 "चुप कर कंजर !"
 "आज तक  खानदान में किसी ने व्रत रखा जो तू रखेगा | अभी घर नही आई और इसका हाल देखो |"
 "खबरदार जो सवेरे  व्रत रखा "
अगली सुबह
"ओये ओमी उठ ओये आ सरगी खा ले पुत्तर "
किसी की तो जून सुधरे  इस घर आकर  !! ठंडी सांस लेकर बीजी ने फेनिया चूल्हे पर  पकानी शुरू की
  भीगी आँखों से देखती हुयी अपने # कडवे करवे को जो सोया था शराब से टल्ली .......................

14 अगस्त 2015

फैसला

 फैसला
" हमारी शादी तो उसी फिक्स डेट पर होगी ना !
"आहा !कुछ दिन और बस , फिर तुम और मैं नयी दुनिया बसायेंगे " 
"तुम्हारे बाबा ने संपत्ति में तुम्हारे नाम जो मकान नॉएडा में छोड़ा हैं वहां थोडा मॉडिफिकेशन करा लो शादी से पहले ही "
" ह्म्म्म !!
"देखते हैं क्या होता हैं !
"अभी तो बाबा को गये १३ दिन भी नही हुए , चलो! फ़ोन रखता हूँ फिर बात करता हूँ "
कहकर रोहित ने ठंडी साँस ली
कुछ देर सोचने के बाद उसने फिर से नेहा को फ़ोन मिलाया
" सुनो मैं अब नॉएडा नही रह सकता| मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ | इतनी जमीन हैं हमारी पुश्तेनी .......अब खेती करूंगा"|
भैया अमेरिका से यहाँ शिफ्ट नही हो सकते और मेरी माँ अपनी ज़ज्बातो के संग बाकि की उम्र जियेगी नाकि कंक्रीट tके जंगल में किसी फ्लैट में बंद होकर | तुम सोचकर मुझे जवाब देना |

9 जुलाई 2015

बगुला भगत


'प्रभा! ओ प्रभा ! “आज बेटी बचाओ अभियान में भाषण देना हैं ।तुम जानती हो न! मेरी हिंदी कितनी कमजोर हैं ।मेरे आने तक जरा एक प्रभाव शाली स्पीच लिख कर रख देना। " कहते हुए चौधरी ज़बर सिंह ने मूंछो को ताव दिया और बोलेरो की चाबी उठा बाहर चल दिए ।चौधरी साहब को शहर के बेटी बचाओ अभियान का सर्वेसर्वा बना दिया गया था । सो मूंछे खुन्डिया करना तो बनता था उनका ।सारे काम निबटा कर, कागज उठाकर, प्रभा ने स्पीच लिखनी शुरू की। थोड़ी देर में ,चारो तरफ मुचड़े कागज के ढेर लगने लगे । हर लफ्ज़ से सिसकिया सुनाई दे रही थी उसकी तीन एबॉर्शन में कत्ल करायी गयी बेटियों की |
नीलिमा शर्मा निविया

30 जून 2015

इक बार फिर से

चूड़ियाँ कितनी पसंद थी उसको , हर साड़ी के साथ की मैचिंग चूडिया दिलाता था न जीतू उसको अपनी पुरानी तस्वीर देख रेणु की आँखों से आंसू बहने लगे |दो बरस हो गये जीतू को इस दुनिया से गये , मायके में पहले से तंगी के हालात थे वहां लौट कर भी क्या कर लेती | दो साल से सफ़ेद चुन्नी और सूनी कलाईया उसका श्रृंगार थे , आइना देख खुद को पहचान लेना मुश्किल था , आज विदेश से छोटा देवर आया तो सास ने उसे रंगीन कपड़े पहन कर आने को कहा हैरानी से उनको देखती वो जब हल्का हरा रंग का सूट पहन बाहर आई तो देवर ने उसे कांच की रं गीन चूड़ियाँ पहनाते हुए कहा आज से आप मेरे नाम की रंगीन चूड़ियाँ पहनेगी , ख़तम हुआ सफ़ेद रंग का व्रत आपके जीवन का | हैरानी से वोह कलाई उठाये अपनी चूड़ियाँ देखती रह गयी और आंसू पलकों पर इक झालर की तरह चमकने लगे तभी सास बोली स्माइल तो कर बहु रानी फोटो लेनी तेरी तेरे बाबा को भेजने के लिय ....................

27 मार्च 2015

उसकी या इसकी

 बीबी  को इस बार देखकर कुछ अजनबीपन महसूस  हुआ , ट्रक लेकर आसाम से लौटा  गुरदित्ता हैरान था | हर बार उसकी बीबी उसको  मिलकर  चातक की तरह चीत्कार कर उठती  थी पर इस बार  एक शांत झील सी  लग रही हैं |कल रात भी बिस्तर  पर एक शांत  भाव से   साथ दिया \ ना इतने दिन बाद मिलने की उत्सुकता  न उलाहने  न फरमाइशे | ऐसा क्या हो गया  सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी \ स्वप्न  में उसे  वोह सड़क किनारे होटल  में मिली लड़की नजर आई जो बार बार खिलखिला रही थी | नींद टूट'ते ही उसने खुद को पसीने में भीगा पाया |  लम्बे समय तक घर से बाहर रहने पर उसने तो अपने  को खुश रखने के साधन बाहर पा लिए थे कही परमजीत भी तो ?? सोचकर उसका दिमाग गुस्से से उबलने लगा | बीजी ने भी कहा था पम्मी आजकल  कमरा बंद किये रहती हैं   हमें क्या मालूम क्या करती हैं | उसने बंद दरवाज़े को जोर से लात मारी  और सामने  पम्मी अरदास कर रही थी
" सच्चे बादशाह  , मेरी तपस्या  मेरे पाठ  सारे सुफल   हुए , मेरा सरताज    ठीक ठाक घर आया  अब उसका कोई काम  यही हो जाए तो मैं चालिया करूंगी |
 गुरदित्ता  आँगन में  सोच रहा था   तन्हाई  किसकी भयावह थी
उसकी या इसकी 

14 मार्च 2015

घर कैसे बने स्वर्ग

" कुछ भूख सी लग रही हैं कुछ बना दो खाने को 
"टाई की नॉट ढीली करते हुए शेखर ने कहा 
"अरे! खुद बना लो कुछ ! 
मैं कुछ लेख लिख रही |
 आज एक अखबार को भेजनी हैं 
अभी अभी उस अखबार के एडिटर उस्मान भाई का जल्दी भेजो का फ़ोन आया था "
"एक कप चाय पिला देती फिर लिखती रहती ! बहुत थक गया हूँ आज " 
"आप कब नही थकते ! जब देखो थके हुए से, मैं अकेली दिन भर दो लफ्जों को तरसती हूँ बन्दा घर आएगा, बीबी से दो बोल प्यार के बोलेगा पर यह तो घर आते ही ऐसे हैं जैसे होटल में आये हैं बीबी चाय बनाये रोटी बनाये | हद हो गयी ! पैसे कमाने वाली बीबी होती तो खुद बनाकर पिलाते गरम चाय यहाँ तो हम दिल का कुछ काम भी नही कर सकते "
 पैर पटकती हुयी निशि रसोई में घुसी
"लो चाय ! और कुछ ? अब बार बार आवाज़ ना लगाना "
"वैसे किस टॉपिक पर लेख लिख रही हो बताती जाओ शायद मैं कुछ आईडिया दे दूँ "
"

घर कैसे बने स्वर्ग ?इस पर
उफ़!! अभी तक कुछ आईडिया ही नही आ रहा "a

10 मार्च 2015

तलाश

तलाश
"देख भाटिया ! अगले महीने मकान खाली कर देना मेरा "
"लेकिन सर जी हमने तो तीन साल की लीज पर आपसे घर लिया था और अभी पांच ही महीने हुए हैं "
"तो क्या हुआ !! दिया ना आज तुझे एक महीने का नोटिस "
"लेकिन सर हमें कारण तो बताये"
'मुझे पड़ोसियों ने बताया तेरी बीबी कश्मीरण हैं और उसके भाई भी तेरे साथ रह कर यहाँ के कॉलेज में पढ़ ते | ओ भगवान् का वास्ता तुझे , मेरा मकान खाली कर | मुझे कोई पंगा नही चाहिए पुलिस से | कल को इन्क्वारी हो जायेगी कि आतंकवादियों यहाँ रहते थे तो मेरी नौकरी चली जायेगी "
और थोड़ी देर के सन्नाटे के बाद फिर दो जोड़ी आँखे इन्टरनेट पर नया घर ढूढने लगी

2 मार्च 2015

" मेरे घर का बजट "


"पेट्रोल के दाम बढ़ गये | सब उपभोक्ता वस्तुए महँगी !! ब्यूटी पार्लर अब दो महीने बाद जाना होगा | पहले भी दो महीने में एक बार खाना बाहर खाते थे अब तीन महीने में एक बार | वई- फाई का प्लान बदलना होगा | अब फिर से दर्जी से कपडे सिलाने होंगे रेडी मेड भी महँगा | सुनते हो अब से थोडा घर खर्च बढ़ा कर देना | काम वाली ने ,चौकीदार ने , स्वीपर ने सबने इस महीने से पगार ज्यादा करने का नोटिस दिया हैं | "
रसोई से पत्नी की जोर से आवाज़ आई 
"हाँ महंगाई तो बढ़ गयी सबको बढ़ी हुयी पगार चाहिए पर मेरी तनख्वाह तो नही बढ़ी !! कहने को बैंक कर्मचारी पर कोल्हू के बैल से ..... न घर में बीबी खुश न बैंक में बॉस . मेरे घर का बजट भी देश के बजट सा हो गया हमेशा घाटे का बजट ||"
पति तौलिया उठा बाथरूम में जा घुसा इसके पहले पत्नी कुछ और डिमांड करे उसे टारगेट कैसे प्राप्त करे यह सोचना हैं

24 फ़रवरी 2015

समझ

काम वाली बाई 
"अरे तुमने फिर काम वाली बदल दी | शहर में काम वालियां मिलती कहाँ हैं और तुम हो कि नखरे करती हो | जरा एडजस्ट करना सीखो | "मौसी ने ऑफिस से आती ज्योति को टोका 
" हाँ ! मैंने फिर काम वाली बदल डाली | जब से घर में cc t v कैमरा लगाया हैं उनका सच सामने आ जाता हैं | वो बच्चे को सही से नही सम्हालती और माँ की दस आवाज़े देने पर एक बार आती | मैंने ऑफिस में अब एक महीने का नोटिस दे दिया हैं | अबसे घर और बच्चा खुद सम्हालुंगी |" मुस्कुराते हुए ज्योति बोली 
" बेवक़ूफ़ !! आजकल नौकरी आसानी से नही मिलती मत छोड़ो चार पैसे जोड़ोगी तो बच्चे के ही काम आयेंगे ना "
" मौसी ! पापा कहते थे पूत कपूत तो क्यों धन संचय , पूत सपूत तो क्यों धन संचय | सो समझ आगयी मुझे | वो दस घरो का काम कर सकती तो क्या मैं अपने ही घर का नही |"

19 फ़रवरी 2015

किन्नर ही तो था

"तो क्या हुआ "
ठाकुर साहेब !! आपको हमारी कसम मत ले जाए इसे , मैंने नोऊ महीने कोख में पाला इस जीव को , आप कैसे किसी और को दे सकते | हाय री किस्मत ! ब्याह के १० बरस बाद  दिया तो वोह भी ठूठ! मेरे लिय तो मेरी संतान , मैं कही जंगल में रहकर पाल लूंगी कम से कम माँ तो कहेगा मुझे , अभी तक बाँझ कहलाती थी अब तो ना जाने क्या क्या कहेंगे लोग " बिलखती ठकुराइन की गोद से चंद घंटे की संतान को ज़बरदस्ती लेजाते हुए ठाकुर भी फूट फूट कर रो दिए
" हम बाप बन कर भी ना बन सके कैसे रखे इस गोल मटोल प्यारे से बच्चे को अपने पास , तुम इसे पढ़ाना अच्छा इंसान बनाना तुमको पैसे की कभी कमी ना होगी " कहकर रजनी किन्नर को सौप आये | आज 2८ बरस बाद वोह ठूठ अपने शहर का मेयर बना हुआ हैं | पुराने सब लोग जानते हैं किसका बेटा हैं| आखिर ऊँचा माथा सुतवा नाक खानदानी रुआब वाला चेहरा चुगली कर रहा था टी. वी पर शपथ कार्यक्रम देखते हुए दो जोड़ी बूढ़ी आँखे एक दुसरे का हाथ थामे जार जार रो रही थी और कोस रही थी समाज को |
किन्नर ही तो था तो क्या हुआ |
चित्र गूगल से

16 फ़रवरी 2015

" फिर क्या होगा "


एक बार सुनील का मन पढाई में बिलकुल नही लग रहा था \ एग्जाम पास थे | माँ बार बार गुस्सा कर रही थी कि ज़रा भी नही पढ़ते हो मार्क्स कम आयेंगे तो कितना बुरा लगेगा कक्षा में | पर कितनी बार पढ़े , हर बार अक्षर अजनबी से लगते थे | माँ संस्कृत का श्लोक याद करने को दे गयी थी
"उद्यमेन ही सिध्यन्ति ना कार्याणि ना मनोरथे\ न ही सुप्तास्ये सिंहस्य पर्वेशंति मुखे मृगा ||"
बार बार पढता था पर हर बार भूल जाता अगला शब्द क्या था | जब माँ उसे रसोई से श्लोक सुनाती तो उसे हैरानी होती कि माँ को कैसे याद होता इतनी जल्दी | जब याद नही हुआ तो उसने झुन्झुलाहट में किताब फेंक कर कहा " मुझसे नही होता याद , आपको कैसे इतना सब याद होता और याद रहता भी , माँ ऐसा करो आप ही मेरी जगह एग्जाम दे आओ कहना उसकी तबियत खराब हैं "
और हाथ बांध कर मुंह बनाकर कुर्सी पर बैठ गया | माँ को उसके भोलेपन पर हंसी आई परगंभीर होकर बोली " ठीक हैं ! मैं तो तेरे एग्जाम दे आऊंगी पर जब तुम बड़े हो जाओगे मुश्किल तो तब होगी ना |"
" तब क्या मुश्किल होगी "
"जब तुम्हारे बच्चे होंगे तो उनकी जिद पर उनके एग्जाम कौन देगा "
अब सुनील जी सोच में पढ़ गये और किताब उठा कर फिर से याद करने की कोशिश में लग गये
माँ मंद मंद मुस्कुरा रही थी

11 फ़रवरी 2015

अभिजात्यता


"चलो काम ख़तम हुआ | साहेब , बीबी भी पार्टी पर जा रहे | अब घर जाकर आराम करूंगी " सोचते सोचते कांति कोठी से बाहर निकली तो तडाक तड़ाक !! चांटो की आवाज़ सुनकर उस ने पीछे पलट कर देखा और कसकर शाल लपेट ली 
सिडाना साहेब पत्नी को थप्पड़ लगा रहे थे और हाथो में मुंह छुपाये उनकी बीबी खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी | ना सुन सकने वाली माँ - बहन की हर गाली इस वक़्त सड़क पर गूँज रही थी |और इंसानियत शर्मिंदा हो रही थी | कसूर इतना था कि बीबी जी इवनिंग गाउन पर ठण्ड से बचने को शाल पहन कर आगयी थी |
छोटे शहर की थी ना उसकी तरह

30 जनवरी 2015

फख्र


" पापा ! कैसी लग रही हूँ यूनिफार्म में !! "
ऋचा को यूनिफार्म में देख कर्नल साहेब की आँखे भर आई
" बहुत सुन्दर बेटा "
"अभी तक मैं अपने बेटो पर नाज करता आया था , आज मेरी बेटी ने भी फख्र से मेरा सर ऊँचा कर दिया '
बिटिया को सर थपथपाते हुए कर्नल साहेब को याद आने लगी अपनी माँ की बाते जो तब उन्होंने नही मानी थी
' अरे लड़की हैं तेरी बीबी के गर्भ में , क्या करोगे तीसरा बच्चा , लड़का होता तो भी ठीक था सफाई करा दो ,आजकल लडकिया नाको चने चबवा देती पहले इनको इतना पढाओ फिर इतना दहेज़ देके ब्याहों ज़माना भी कित्ता ख़राब !"

17 जनवरी 2015

( स्वयंसिद्ध)

"यह बच्चा कौन हैं जो सड़क पर झाड़ू लगा रहा हैं "
दोपहर में मुश्किल से आँख लगी थी कि झाडू की आवाज़ से खलल पड़ गया और मीना जोर से चिल्लाई 
माँ आपने राशन से गेंहू लाने को कहे थे न , मैं वोह लेकर आ रहा था वहीँ यह बच्चा भीख मांग रहा था मैंने कहा मेरे साथ घर चलो खाना खिला दूंगा पर पैसे नही दूंगा क्या पता पैसे लेकर क्या गलत आदत लगा बैठ'ता " सनी ने माँ को बताया
" पर यह अब झाड़ू क्यों लगा रहा हैं "
" माँ साइकिल से उतारते वक़्त थोडा गेहू गिर गया था "
" गलत बात ! आपको खुद एकत्र करना चाहिए था ,वोह बच्चा हैं | तुम इसको खाना खिलाने लाये हो, पर बदले में कुछ काम भी करा लिया इस'से इसके बालमन को लगेगा कही भी छोटा सा काम करो दोएक वक़्त का खाना खा लो ,खुद काम करके इसको सीख देते कि इंसान को सब काम खुद करने चाहिए अगर तुम चाहते हो यह आगे भीख न मांगे तो इसको शाम को मुफ्त शिक्षा दिया करो "
कहते हुए मीना बच्चे के लिय खाना लेने रसोई घर की तरफ चल दी और सनी भी माँ के कहे का चिंतन करने लगा

उतना ही

"
उतना ही "

नीचे आँखे किये वोह मुस्कुरा कर बोली 
" अब भी उतना ही " 
" और कितना "
"जितना तुम्हारा दिल कहता उस'से बस उतना दुगुना " 
"मेरा दिल तो कहता तुम मुझसे प्यार ही नही करती "
" तो यही समझ लो मैं दुगुना प्यार नही करती "
कुछ बाते जो पता होती हैं तो भी उसे बार बार लफ्जों में सुन लेने का दिल चाहता हैं और पुरुष जानते हैं स्त्री के दिल पर उनका ही अधिकार हैं फिर भी शरारती अंदाज़ में हर बार बार बार पूछते हैं 
"कितना प्यार करती हो मुझे "
और स्त्री मंद मंद मुस्कुराती हैं मन के अंदरूनी कोने से 
"उतना ही 

18 दिसंबर 2014

फैसला

फैसला 
" हमारी शादी तो उसी फिक्स डेट पर होगी ना ! आहा !कुछ दिन और बस , फिर तुम और मैं नयी दुनिया बसायेंगे , तुम्हारे बाबा ने संपत्ति में तुम्हारे नाम जो मकान नॉएडा में छोड़ा हैं वहां थोडा मॉडिफिकेशन करा लो शादी से पहले ही "
" ह्म्म्म !! देखते हैं क्या होता हैं ! अभी तो बाबा को गये १३ दिन भी नही हुए , चलो! फ़ोन रखता हूँ फिर बात करता हूँ " कहकर रोहित ने ठंडी साँस ली 
कुछ देर सोचने के बाद उसने फिर से नेहा को फ़ोन मिलाया " सुनो मैं अब नॉएडा नही रह सकता मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ | इतनी जमीन हैं हमारी पुश्तेनी अब खेती करूंगा | भैया अमेरिका से यहाँ शिफ्ट नही हो सकते और मेरी माँ अपनी ज़ज्बातो के संग बाकि की उम्र जियेगी नाकि कंक्रीट tके जंगल में किसी फ्लैट में बंद होकर | तुम सोचकर मुझे जवाब देना |

17 दिसंबर 2014

" बोल काम करेगा "

"बहुत गालियाँ दे चुकी हो बेरोज़गारी पर , आओ मैं दिखाती हूँ तुमको एक ऐसा उद्योग जहा जन्म से पहले ही रोजगार का जुगाड़ हो जाता हैं और हम सब उस रोज़गार के पनपने में सहायक हैं . क्यों? विश्वास नही हो रहा मेरी बात पर ! "कहते हुए निशा दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और कार तेज़ी से गाँधी रोड की तरफ मोड़ दी , बिंदाल नदी पर बने पुल के नीचे बनी झुग्गियो के सामने जैसे ही कार रुकी नंगे और गंदे कपडे पहने बच्चो ने शोर मचाना शुरू कर दिया रुमाल से मुह को दबा कर मैं नीता दी के पीछे चलने लगी उफ़ यहाँ कौन सा कुटीर उद्योग लगा हुआ हैं ? एक कोठरी में घुसते ही नीता दी ने मुझे कहा " अब आया कुछ समझ " चारो तरफ गंदगी का साम्राज्य था प्रोढ़ उम्र की एक गर्भवती महिला एवं उसका पति छोटे छोटे बच्चो से घिरे थे , घर की माली हालत बहुत ख़राब लग रही थी परन्तु इतने सारे बच्चे !! कहाँ से खाते होंगे और इनका रोजगार से क्या लेना देना यह सोच मुझे परेशान करने लगी ...नीता दी ने कहा यह लोग भिखारी हैं .बच्चे पैदा करते हैं भीख मंगवाने के लिय , इनका अपना एक मकान भी हैं प्रेम नगर में, परन्तु रहते यही हैं आदत सी पढ़ गयी हैं इनको ऐसे हालत में रहने की , मैं इनके लिय एक N G O चलाती हूँ परन्तु तुम जैसे लोग तरस खाते हैं इन जैसो पर , इनको भीख मत दो काम दो तुरंत आय कीचाह में यहाँ की हर नारी हर साल बच्चा पैदा करने को मजबूर की जाती हैं और हर बच्चा भीख मांगने को मजबूर ,
घर आते हुए रेड सिंग्नल पर अब मेरे हाथ पर्स से पैसे निकाल लेने को नही उठे अपितु बोल उठी " "बोल काम करेगा '

" कसूर किसका "

दीवार पर लटकी तस्वीर देखकर नैना की आँखों से अविरल आंसू बहने लगी आज एक बरस बाद मायके आई थी माँ की बरसी पर | १3महीने पहले आयुष एक हादसे में चल बसा था | कितनी बार कहा था अपने इस १४ बरस के भाई कोकि जब भी ट्यूशन पढने जाया करो कानो में हैडफ़ोनलगकर गाने मत लगाया करो |सड़क पर चलते ट्रैफिक की आवाज़ नही सुनाई देती परन्तु आजकल के किशोर उम्र के बच्चे कहाँ किसी की बात सुनते और ऐसे ही एक दिन एक कार वाले ने टक्कर मारी और फरार हो गया | आस -पास गुजरती किसी भी गाड़ी ने रुक कर उसे समय से हॉस्पिटल नही पहुँचाया और अनहोनी होकर रह गयी \ उसके जाने ने माँ को बुरी तरह तोड़ दिया और दो महीने से पहले ही माँ को दिल का दौरा पढ़ा और स्वर्ग सिधार गयी| चुन्नी के पल्ले से तस्वीर पोंछती नैना उस पल को कोस रही थी |कसूर किसी का भी रहा हो घर सूना उसका हुआ था

11 सितंबर 2014

" ग्रहण "

" ग्रहण "

उम्मीद ही नही थी कि कोई इतना चुप्पा हो सकता हैं | हॉस्पिटल के बरामदे में एक अकेला चुपचाप कल से शून्य को ताकता हुआ नजर आरहा था | आज उसे कैंटीन में देखा तो पूछ लिया 
" किसके साथ आये हो यहाँ " 
पलके ऐसे उठी जैसे ग्रहण लगा हो चाँद को और होंठो से लफ्ज़ निकले
 ' यादो के " 
यादो के!!!इसका क्या मतलब "
" पिछले बरस आज के दिन मेरी माँ इसी हॉस्पिटल से अपनी अनंत यात्रा को गयी थी और मुझे भाई ने घर से बाहर निकाल दिया था आज माँ की बरसी हैं अपना कोई घर नही सो यहाँ माँ को मिलने आया हूँ "
अब मेरी सोच को जैसे ग्रहण लग गया 


नीलिमा शर्मा निविया