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18 दिसंबर 2012

Maa ki Najar se

अम्मा!!!!! अम्मा!!!!!! 
फ़ोन पर किसी की बात सुनकर रमेश  जोर से चिल्लाया ......आधी रात को कोई बुरा सपना देख लियो का ? यह लड़का भी ना , रात  भर देर तलक पढता हैं  फिर सुबह मुंह ढापे पढ़ा  रहता हैं .मीना की माँ ने रजाई एक तरफ सरकाई  और  पलंग   के पास चप्पल खोजने लगी .तब तक रमेश अम्मा के पास आ पहुंचा .उसकी बदहवासहालत देख कर अम्मा का दिल जोर से धड़क   उठा   "क्या हुआ?"
"अम्मा ! वोह  .वॊऒऒऒऒऒऒऒ "
 "क्या वॊओ वॊऒओ किये जा रहे हो क्या हुआ "
 "अम्मा! वो जीजी जी ....जी इ इ इ इ इ "
 "हाय रे! मेरी फूल सी लाडो  को क्या हुआ/" 
 "अम्मा वो हस्पताल में हैं "
 "हाय रे   !!!"
 "लग गयी होगी ठण्ड  मरजानी दिल्ली की ठण्ड भी तो।। "
" कित्ती बार कहा इस लड़की को  गरम कपड़े पहना कर पर  यह आजकल की लडकियाँ " ! 
"इस बार तो लड्डू भी न भेजे मैंने बनाकर "
 "पिछली बार भी कित्ती खांसी हुई थी ओर  बुखार भी .. "
 अम्मा थी कि बुदबुदाये    जा रही थी  खुद ही खुद पर  कभी खुद को कोस रही  थी  कि  इस बार लड्डू क्यों नही बना कर भेजे 
 खुद डाक्टर बन रही हैं पर इलाज तो माँ के ही काम  आते हैं ना . चार किताबे पढ़ लेने से  जिन्दगी पढनी नही आ जाती इन बच्चो को 
 अलमारी से अपने गरम कपडे निकल कर बैग में ठूंसती  अम्मा अनजान थी कि रमेश अपने बाबूजी के कान में क्या कह रहा हैं उन्हें तो अपनी फूल सी मीना याद आ रही थी  कितनी मेधावी थी उनकी मीना . उनकी बिरादरी वालो ने बहुत चाहा  की कि अम्मा अपनी मीना का ब्याह कर दे अच्छा  घर बाहर देखकर , पर अम्मा को मीना का सपना पूरा करना था उसको डाक्टर बन ना था 
 4 साल देहरादून के एक पैरामेडिकल  से उसने पढाई की  अब उसको इंटर्न शिप करनी थी 
 "देहरादून में भी बहुत स्कोप हैं  परन्तु दिल्ली में इंटर्नशिप करने से अच्छी नौकरी मिलेगी  '...मीना की बात से अम्मा ने उसको दिल्ली भेज दिया 
 कितनी खुश थी लाडो .परसों ही तो फ़ोन पर बात की उसने के अम्मा आप परेशान मत होना मैं  यहाँ ठीक हूँ 
 जानती थी अपनी बेटी को  बहुत ही संस्कारी लड़की हैं  ऐसा नही कि उसने अपनी बेटी को नए ज़माने के साथ चलना नही सीखाया था  परन्तु उसकी बेटी ही इतनी गुणवान ओर संस्कारी थी कि कुछ भी करती थी तो माँ के संज्ञान में ...
 ना जाने कैसे होगी ?
  नहा कर जब बाहर आई तो देखा कि  रमेश के बापू भी तैयार होकर खड़े थे  कितने खिलाफ थे यह मीना के डाक्टर बन जाने के ...कि  जमाना बहुत ख़राब हैं  लड़की जात हैं ब्याह के अपने घर जाए वह जाकर जो मर्जी करे जितना मर्जी पढ़े ...आज बिटिया  की तबियत जरा सी नासाज हुई  नही कि  साथ चलने को तैयार हो गये . मीना की अम्मा मन ही मन मुस्कराने लगी ...... कार में बैठ  कर भगवन को  मन ही मन नमस्कार करके यात्रा शुभ हो की कामना करने लगी 


 सुबह के चार बजने को हैं सुबह  ट्रैफिक कम होता हैं फिर भी रमेश  ने कार तेज स्पीड से चलानी शुरू कर दी 
 शायद बहन की फ़िक्र हैं इसको भी  भगवन इन भाई बहन का प्यार हमेशा बनाये रखे  . उसने नजर भर कर रमेश के बाबूजी को देखा ... कैसा पीला लग रहा हैं चेहरा .... बेटी की फ़िक्र या इतनी जल्दी सुबह उठने की  वजह से ... जो भी हो जब बेटी का हाथ हाथो में लेंगे और वोह कहेगी कि   बाबूजी  ताश खेले  भाभो में हर बार की तरह इस बार भी मैं  ही जीतूंगी  तब देखना कैसे ंमंद मंद ं मुस्करायेंगे 
 कार तेजी से दौड़ रही थी साथ ही मन भी .... बस मीना की डाक्टरी  पूरी हो जाए  तो इसका ब्याह कर दूँगी  अगले साल ... छोटे छोटे नाती नातिनो के साथ खेलने का बड़ा  मन करता हैं .साथ वाली रामो जब अपने बच्चो संग मायके आती हैं और उसके बच्चे जब उसको भी गोरी  नानी  कहते हैं तो मन कही सुकून सा पाता  हैं कि  उसके नाती भी उसको गोरी नानी कहेंगे या आजकल के  माँ - बाप की तरह मीना भी उनको बड़ी मम्मा कहना सिखाएगी 
 सोचो के सागर में गोते खाती  मीना कब दिल्ली पहुँच गयी पता भी नहीं चला . कार सफदरगंज अस्पताल के सामने रूक गयी रमेश तेजी  से  रिसेप्शन पर पंहुचा  अम्मा सामने रखी कुर्सी पर  बैठ गयी 
 सुबह सुबह अखबार पढने ंका आनद ही कुछ और होता हैं . पहले पेज के तीसरे कलम में एक खबर पर नजर एक पल को रुकी " दिल्ली ंमें चलती बस में एक छात्रा से गैंग  रेप " 
"निगोड़े ,"क्या हो गया यह आजकल के बच्चो को ! लडकिया दिल्ली जैसे राजधानी में ही जब स्सुरक्षित नही तो गाँव  के दबंगों के सामने उनकी क्या हिम्मत !  मन ख़राब सा हुआ पढ़ कर ओर अखबार सामने रख कर  देखने लगी कि  रमेश  किदर गया ? 
 सामने से दो पुलिस वालियों के संग  रमेश आ रहा था "इसकी आँखे रोई सी क्यों हैं ?  माँ का मन आशंकित हुआ 
" अम्मा जी ःहिम्मत रखो  हम आरोपी को छोड़ेगे नही . "
"अरे हुआ क्या?????????????????"
" मेरी बच्ची को क्या हुआ ?"
"अरे रमेश!!!!"
" हाय मेरी बच्ची !"
 तेजी से कदम रखती वोह आई सी यू  की तरफ भागी जिधर  से रमेश आ या  था 
"हाय मेरी बच्ची  !!!तुझे भगवान् मेरी भी उम्र दे "
मन ही मन बलाए उतरती एक माँ की आँखों से आंसू बहने लगे 
रमेश के बाबु जी माथा पीट रहे थे 
 रमेश की आँखे खून के आंसू रो रही थी 
 पुलिस वाली ने हाथ थामकर उनको सब बताया 
( नही सीसा उड़ेल दिया उसके कानो में )
 वोह सब !!
 जिसको कभी कोई माँ- बाप नही सुन ना  चाहेगा 
 कोई भाई  इस दिन को देखने से पहले मर  जाना चाहेगा 
 अपनी हाथ की राखी उसको जहर लगने लगेगी 
 उसके सामने अखबार की वोह खबर घूम गयी 
 धच्च! से वोह जमीन पर गिर गयी 
 पूरी दिल्ली में सिर्फ मेरी बेटी !!!
.....
.
.
 अब माँ के हाथ जो उसकी सलामती की दुआ कर रहे थे 
  सोचने लगे कि  वो दुआ करे तो क्या? 
 सुन्न था  उसके लहुलुहान  मन का कोना 
 नीलिमा शर्मा 

20 टिप्‍पणियां:

ranjana bhatia ने कहा…

बेहद दर्दनाक कहानी वाकई कुछ ऐसा ही हुआ होगा ...शर्मनाक हादसा जो कल से दिलो दिमाग से हट ही नहीं रहा है ...बेटियों को जल्दी घर वापस आने और सिर्फ मेट्रो में आने की हिदायतें जारी हैं ...एक ऐसा खौफ दिल में बैठ गया है जो न जाने कैसे दूर होगा ..आपकी लिखी कहानी सच्चाई के बहुत करीब है ....ईश्वर सही में उन माता पिता को इस दुखद घडी को सहने की हिम्मत दे ...

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

सार्थक लेखन ........... सामयिक आलेख .......... दिल - दिमाग को झंझकोरती रचना ...........

નીતા કોટેચા ने कहा…

dil dahela dene vali bat hai sach..khuda kare duniya me kisi beti ke sath aisa na ho....

Khare A ने कहा…

बहुत ही शानदार तरीके से आपने समसामयिक घटनाक्रम को उल्लेखित किया है अपनी कहानी में!
कहानी में तारतम्येता और स्पीड बराबर बनी हुई है! एवरीथिंग इज परफेक्ट ! बस इस एक लाइन के
"अपनी हाथ की राखी उसको जहर लगने लगेगी", ऐसा कोई भाई क्यूँ सोचेगा! उसकी बहिन के साथ किसी ने
जबरदस्ती की है! ये पोइंट निगेटिविटी की और इशारा करता ! मुझे ऐसा लगा! वरना कहानी अपनी बात कहने में सक्षम है ! आपको बहुत बहुत बधाई !

Shanti Purohit ने कहा…

dil ko jakjor diya khahani ne sartak lekh

उपासना सियाग ने कहा…

बेहद मार्मिक ....जिस पर बीती वही महसूस कर सकता है यह ....

Meenakshi Mishra Tiwari ने कहा…

:(

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kya kahun...!!
"behoshi ke halat me bhi uske ankho me aanshu the" doctor, safdarjung hospital..
ye statement maine dekha paper me... yani dard ki parkashtha se wo gujri hogi...
ufff!!
ek dardnak kahani..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत मार्मिक .... न जाने क्या बीटी होगी माँ बाप पर ... उसी का एहसास कराती हुई कहानी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 20 -12 -2012 को यहाँ भी है

....
मेरे भीतर का मर्द मार दिया जाये ... पुरुष होने का दंभ ...आज की हलचल में .... संगीता स्वरूप
. .

vandana ने कहा…

सच्ची घटना को कहानी का अच्छा प्रवाह मिला है मात्र खबर नहीं दिल को झकझोरती है आपकी अभिव्यक्ति

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

क्या बीत रही होगी -और जीवन भर क्या बीतेगी ,उस माँ पर पिता पर ,उस भाई पर !

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

कहानी मार्मिक है ।

Anita ने कहा…

हम लोगों का ये हाल है... तो जिसके ऊपर बीती... उसका क्या हाल हो रहा होगा... :((

vandana gupta ने कहा…

रौंगटे खडे करता सच]

अपने इस दर्द के साथ यहाँ आकर उसे न्याय दिलाने मे सहायता कीजिये या कहिये हम खुद की सहायता करेंगे यदि ऐसा करेंगे इस लिंक पर जाकर

इस अभियान मे शामिल होने के लिये सबको प्रेरित कीजिए
http://www.change.org/petitions/union-home-ministry-delhi-government-set-up-fast-track-courts-to-hear-rape-gangrape-cases#

कम से कम हम इतना तो कर ही सकते हैं

Pankaj Kumar Sah ने कहा…

बहुत खूब .... आप भी पधारो पता है http://pankajkrsah.blogspot.com

वीना ने कहा…

ऐसा सच जिसे मन झुठलाना चाहता है...

Neelima sharrma ने कहा…

shukriyaa mitro

avanti singh ने कहा…

सार्थक अभिव्यक्ति

Neelima sharrma ने कहा…

Thank u so much Avanti jee