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24 जुलाई 2014

सफ़ेद चुन्नी

"नही नही !! मैं नही पहना सकता अपनी बहु को सफ़ेद चुन्नी मैं कैसे कहूँ अपनी बहु को तुझे अब उम्र भर सफ़ेद चुन्नी पहन'नि हैं" कहते कहते पापा फफक फफक कर रो पढ़े , हर कोई अपने भाव लफ्जों से नही कह पता, कुछ लोगबाहर से सख्त बने रहते हैं उम्र भर नारियल की तरह, उनका प्यार भी कठोर लफ्जों में ही निकलता हैं पर भीतर छोटी से बात पर उनके मन की मिटटी गीली हो जाती हैं मेरे पापा भी बस ऐसे ही हैं रोबीले से हर कोई जिनसे बात करने में घबराता हैं , आज पापा जार जार रोये .... आज बिरादरी में ससुर बहु के सर पर दुपट्टा डालता हैं .और सारी बिरादरी जार जार रो रही थी कि अभी बहु को इतनी छोटी उम्र में सफ़ेद दुपट्टा ओढ़ना पडेगा , बुजुर्ग पापा बेटी के कंधे का सहारा लेकर आये और बहु पर ऑरेंज रंग का दुपट्टा डाल कर रोती हुयी बहु के सर पर हाथ रखकर बोले आज से तू मेरी बेटी , नही पहनेगी सफ़ेद रंग , मेरे बेटे को कतई पसंद नही था यह रंग .........बहु ने पापा के पैरो पर हाथ रख दिया बेटिया पापा से लिपट गयी और बिरादरी में काना फूसी शुरू हो गयी ..कुछ खुश थी और कुछ ............ जिन्दगी हैं रंग बदलती ही रहती हैं
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