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19 फ़रवरी 2015

किन्नर ही तो था

"तो क्या हुआ "
ठाकुर साहेब !! आपको हमारी कसम मत ले जाए इसे , मैंने नोऊ महीने कोख में पाला इस जीव को , आप कैसे किसी और को दे सकते | हाय री किस्मत ! ब्याह के १० बरस बाद  दिया तो वोह भी ठूठ! मेरे लिय तो मेरी संतान , मैं कही जंगल में रहकर पाल लूंगी कम से कम माँ तो कहेगा मुझे , अभी तक बाँझ कहलाती थी अब तो ना जाने क्या क्या कहेंगे लोग " बिलखती ठकुराइन की गोद से चंद घंटे की संतान को ज़बरदस्ती लेजाते हुए ठाकुर भी फूट फूट कर रो दिए
" हम बाप बन कर भी ना बन सके कैसे रखे इस गोल मटोल प्यारे से बच्चे को अपने पास , तुम इसे पढ़ाना अच्छा इंसान बनाना तुमको पैसे की कभी कमी ना होगी " कहकर रजनी किन्नर को सौप आये | आज 2८ बरस बाद वोह ठूठ अपने शहर का मेयर बना हुआ हैं | पुराने सब लोग जानते हैं किसका बेटा हैं| आखिर ऊँचा माथा सुतवा नाक खानदानी रुआब वाला चेहरा चुगली कर रहा था टी. वी पर शपथ कार्यक्रम देखते हुए दो जोड़ी बूढ़ी आँखे एक दुसरे का हाथ थामे जार जार रो रही थी और कोस रही थी समाज को |
किन्नर ही तो था तो क्या हुआ |
चित्र गूगल से
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